Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
असत्यमेव सत्याभं प्रतिभानमिदं स्थितम् ।
इति स्वभावसंपत्तिरिति भूतानुभूतयः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार असत्य
होता हुआ भी सत्य के तुल्य प्रतीत होनेवाला यह प्रातिभासिक जगत् स्थित है, इस प्रकार का
नियति का स्वभाव है ओर ऐसे जीवन मरण आदि पदार्थो के अनुभव हैं