Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियाद्रव्यशुद्ध्यशुद्धी स्वकर्मणाम् ।
न्यूनत्वे चाधिकत्वे च नृणां कारणमायुषः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
आयु के निमित्तभूत अपने कर्मों की देश, काल,
अनुष्ठान और द्रव्य की अशुद्धि और शुद्धि तथा न्यूनता और अधिकता मनुष्यों की आयु में
कारण है। आयु के हेतुभूत कर्मों में देश आदिकी अशुद्धि से वैगुण्य आने से फल की न्यूनता
होती है और देश आदि की अधिक शुद्धि से अधिक फल होता है, यह भाव है