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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

प्रबुद्धलीलोवाच । मरणं मे समासेन कथयेन्दुसमानने । किं सुखं मरणं किं वा दुःखं मृत्वा च किं भवेत् ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रबुद्ध लीला ने कहा : हे चन्द्रमुखी देवि, मुञ्जसे आप संक्षेप से मरण का वृत्तान्त कहिये, क्या मरण सुखरूप है अथवा दुःखरूप है ओर मरने के बाद क्या होता है ? लीला के पूछने का मतलब यह है कि पूर्ववर्णित मरणदुःख सबको समान होता है या किसीको सुख भी होता है और मरने के बाद क्या सबकी एकसी गति होती हे या योगियोँ की विशिष्ट गति होती है ?