Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
एवं कर्मानुसारेण जन्तुरन्त्यां दशामितः ।
भवन्त्यन्तं गतवतो दृङ्मर्मच्छेदवेदनाः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार अपने कर्मो के अनुसार जीव अन्त्य दशा को
प्राप्त होता है, आयु की समाप्ति को प्राप्त हुए पुरुष को मर्मको पीडा पहुँचानेवाली वेदनाओं
का प्रत्यक्ष अनुभव होता है