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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

भावाभावेषु भावानां कथं नियतिरागता । कथं भूयोऽप्यनियतिर्मृतिजन्मादिसूचिता ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

यहाँ पर प्रश्न का इस समय मुझे क्या करना चाहिए ।* ऐसा अभिप्राय नहीं है क्योकि ऐसा मानने से एक तो अन्य प्रश्नो से असंगति आती है और दूसरा प्रश्न के उत्तर में देवीजी ने लीला के कर्तव्य कार्य का उपदेश नहीं दिया है । देह आदि भाव पदार्थो के जीवन, सौख्य आदि तथा दुःख दौर्मन्य (दौर्बल्य) आदि अभावों में पहले नियम कैसे आया ओर फिर मरण, जन्म आदि से सूचित अनियम भी कैसे आ गया