Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
यदैवामोहमादत्ते नादत्ते पवनस्तदा ।
नत्वादत्ते यदा प्राणान्मोहमायात्यलं तदा ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
जब देही अल्प मूर्च्छा को प्राप्त होता
है, तब उसके प्राण अंग-प्रत्यंगों को नहीं थामते जब वह प्राणों को भी नहीं चला सकता
तब वह गाढ मूर्छा को प्राप्त होता है