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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

स स्वप्न इव संकल्प इव चेतति तादृशम् । तस्मिन्नेव क्षणे तस्य स्मृतिरित्थमुदेति च ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

वह स्वप्न की नाई ओर मनोरथ की नाई, वैसा अनुभव करता है और उसी क्षण में उसकी स्मृतियाँ (जैसा कि पहले कहा गया है) उदित होती है