Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
मृत एवानुभवति कश्चित्सामान्यपातकी ।
स्ववासनानुसारेण देहं संपन्नमक्षतम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
साधारण पापी की गति बतलाते हैं।
कोई साधारण पापी मरते ही अपनी वासनाओं के अनुसार प्राप्त हुए अविकल मनुष्य
शरीर का अनुभव करता है, क्योंकि "उभाभ्यामेव मनुष्यलोकम्" (पुण्य और पापों से मनुष्यलोक
को प्राप्त होता है) ऐसी श्रुति है