Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verses 18–19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verses 18–19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 18,19

संस्कृत श्लोक

अथ मध्यमपापो यो मृतिमोहादनन्तरम् । सशिलाजठरं जाड्यं कंचित्कालं प्रपश्यति ॥ १८ ॥ ततः प्रबुद्धः कालेन केनचिद्वा तदैव वा । तिर्यगादिक्रमैर्भुक्त्वा योनीः संसारमेष्यति ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

मध्यम पापी की गति को कहते हैं। और जो मध्यम पापी है, वह मरणमूर्छा के पश्चात्‌ पत्थर के उदर की (मध्य भाग की) नाई घनी मूर्छा का कुछ कालतक अनुभव करता है| तदुपरान्त जब उसे चेतना प्राप्त होती है, तब वह कुछ काल में या उसी समय तिर्यग्‌ आदि क्रम से योनियों को भोगकर संसार में प्राप्त होता है