Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

केवलं वातसंरोधाद्यदा स्पन्दः प्रशाम्यति । मृत इत्युच्यते देहस्तदासौ जडनामकः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

इससे यह सिद्ध हआ कि मरण देह का धर्म है, आत्मा का धर्म नहीं है, ऐसा मानते हैं । प्राणवायु की गति रुकने से जब शरीर में स्पन्द (चेष्टा) शान्त हो जाता है, तब यह देह, जिसका दूसरा नाम जड़ है, 'मृत” कहलाती है