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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 42

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

याम्यं याति पुनर्लोकं पुनरेव भ्रमक्रमम् । भूयो भूयोऽनुभवति नानायोन्यन्तरोदये ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

फिर वह पूर्वोक्त रीति के अनुसार यमलोक में जाता है, फिर वैसे ही विविध योनियों की प्राप्ति में भ्रमक्रमका पुनः पुनः अनुभव करता है