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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

इत्याजवं जवीभावमामोक्षमतिभासुरम् । भूयो भूयोऽनुभवति व्योम्न्येव व्योमरूपवान् ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

आकाश में आकाशरूपी जीव इस प्रकार के वेगवान परिवर्तन का मोक्ष होने तक पुनः पुनः अनुभव करता है