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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

प्रथमोऽसौ प्रतिस्पन्दः पदार्थानां हि बिम्बकम् । प्रतिबिम्बितमेतस्माद्यत्तदद्यापि संस्थितम् ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि यह माना जाय कि संकल्प से उत्पन्न हुई जगत्सत्ता से यह जगत्सत्ता भिन्न है, तो इस पक्ष में भी उसकी (संकल्पजनित जगत्‌-सत्ता की) प्रतिबिम्बतुल्य होने के कारण वह तिथ्या ही है, ऐसा कहती है । संकल्पजनित स्फुरण रूप पदार्थों का पहला विवर्तं बिम्बरूप ठहरा, उससे जो प्रतिबिम्ब हुआ वह आज भी वैसा ही स्थित है