Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

चिदाकाशोऽयमेवांशं कुरुते चेतनोदितम् । स एव संविद्भवति शेषं भवति नैव तत् ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार चेतन और अचेतन के विभाग की कल्पना करने में भी निमित्त कहती है । यह चिदाकाश ही (ईश्वर ही) प्रतिबिम्ब होकर आविर्भूत ओपाधिक जीव विभाग को करता है, वही अंश संवित्‌ (चेतन) होता है, शेष अध्यारोपित है, वह चेतन नहीं हे, किन्तु अचेतन ही है