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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 54

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

इति सर्वशरीरेण जंगमत्वेन जंगमम् । स्थावरं स्थावरत्वेन सर्वात्मा भावयन् स्थितः ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार सर्वात्मक चेतन ही जंगमरूप से जंगम का (चरका) और स्थावररूप से स्थावरका (अचर का) संकल्प करता हुआ सबके स्वरूप से स्थित है