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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 55

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 55

संस्कृत श्लोक

तस्माद्यज्जङ्गमं नाम तत्स्वबोधनरूपवत् । तेन बुद्धं ततस्तद्बत्तदेवाद्यापि संस्थितम् ॥ ५५ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए जो जंगम्‌ जगत्‌ है, उसको उसने अपने संकल्प के अनुसार जैसा जाना वैसा ही वह आज तक स्थित है