Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 56, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
यच्चित्तं तन्मयो जन्तुर्भवतीत्यनुभूतयः ।
सदेहेषु विदेहेषु न भवत्यन्यथा क्वचित् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसा चित्त होता है, वैसा ही जन्तु होता है, इसमें
“यच्चित्तस्तन्मयो भवति गुह्यमेतत् सनातनम्" (जैसा चित्त होता है, तदनुरूप ही चित्तमय
पुरूष होता हे यह सनातन रहस्य है) इत्यादि श्रुतियाँ तथा विद्वानों के अनुभव प्रमाण हैं, जो
विदेह ओर सदेह योगियो में प्रसिद्ध हैँ अथवा जीवित ओर मृत जीवों में कहीं पर भी इस नियम
में उलट फेर नहीं होता, इसलिए चित्त ही संसार है, उसकी प्रयत्नपूर्वक शुद्धि करनी
चाहिए