Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 57, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 57, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

स्वप्नाद्यर्थावभासेन संविदेव स्फुरत्यलम् । अस्फुरन्ती तु तेनैव यात्येकत्वं तदात्मिका ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

स्वप्न आदि पदार्थो के अवभास से संवित्‌ ही खूब स्फुरण को प्राप्त होती हे स्फुरण को प्राप्त न होती हुई वह संवित्‌, जो कि स्वप्न पदार्थरूप है, पदार्थो के साथ एकता को प्राप्त होती है