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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 58, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

त्वं तु तेन शरीरेण सत्यसंकल्पतः सुते । दृश्यसे स्ववदातेन चित्रं तत्र तवोपरि ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हे पुत्री, तुम अपने सत्यसंकल्पवश अत्यन्त स्वच्छ आतिवाहिक शरीर से, जिसे मनुष्य नहीं देख सकते, दिखाई देती हो, इसलिए तुम्हारे दर्शन से लोगों को ओर आश्चर्य होगा