Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 58, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
यद्वासना त्वमभवो देहं प्रति तदेव ते ।
रूपमभ्युदितं बाले तेन प्राक्सदृशं तव ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि किसीको यह शंका हो कि दिव्य शरीर पूवदेह के आकारवाला नहीं होगा, तो लोगों
को उसमें “यही वह है ऐसी प्रत्यभिज्ञा नहीं हो सकेगी, इसलिए उसका पूर्व शरीर के सदश
आकार होना आवश्यक है, उसके पूर्व शरीर के आकारवाला होने मे क्या बीज है ? इस शंका
की निवृत्ति के लिए उसके पूर्व शरीराकार होने में हेतु कहती है ।
हे वत्से, अपने शरीर के प्रति तुम्हारी जैसी वासना थी, वही तुम्हें रूप प्राप्त हुआ, इसलिए
तुम्हारा शरीर पूर्व शरीर के सदृश हुआ