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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 58, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

रूढातिवाहिकीभावः सर्वो भवति देहकः । निर्जलाम्भोदसदृशो निर्गन्धकुसुमोपमः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

जिनमें आतिवाहिकता बद्धमूल है, ऐसे सभी शरीर जलरहित शरत्कालीन मेघ के तुल्य और गन्धहीन पुष्प की तरह होते हैं