Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 58, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
लीलोवाच ।
वद देवि कियान्कालो गतोऽस्यामिह मन्दिरे ।
समाधौ मयि लीनायां महीपाले शवे स्थिते ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
लीला ने कहा : हे देवि, इस पाद्म सृष्टि में इस मन्दिर में मेरी समाधि में और राजा पद्म की
शवावस्था में कितना समय व्यतीत हुआ ?