Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 58, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
ज्ञाप्तिरुवाच ।
इह मासस्त्वतिक्रान्त इह दास्याविमे तव ।
रक्षार्थं वासगृहके स्वपतोऽवहिते स्थिते ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीसरस्वती देवीजी ने कहा : भद्रे, इस सृष्टि
में, इस राजमहल में एक महीना व्यतीत हुआ। ये तुम्हारी दो दासियाँ, जो तुम्हारी देह की रक्षा
के लिए सावधान थी, अब सोती हैं