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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 58, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

सा विदूरथलीलाथ समाकुलविलोचना । गृहमालोकयामास तत्तेजःपुञ्जभास्वरम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

उनके दृश्य होने के बाद विदूरथ-लीला &. वासना का अत्यन्त उच्छेद होने पर आतिवाहिक देह की कल्पना भी नहीं हो सकती है, यह सूचन करने के लिए वासनायुक्त कहा है । की आँखोंमें चकाचौंध हो गई | उसने अपने घर को उनके तेजःपुंज से दैदीप्यमान देखा