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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 6, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 6, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अर्यं सदेव इत्येव संपरिज्ञानमात्रतः । जन्तोर्न जायते दुःखं जीवन्मुक्तत्वमेति च ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई शका करे कि तव तो दुःख की निवृत्ति में अथवा जीवन्मुक्ति में अन्य साधन होंगे ? इस पर कहते है। यह परमात्मा सत्‌ ही है, केवल इस प्रकार के ज्ञानमात्र से ही जीव को क्लेश नहीं होता ओर वह जीवन्मुक्तिको प्राप्त होता है