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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 60, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

अहो नु सुचिरेणाद्य ज्ञातं ज्ञातव्यमक्षतम् । मया यथेदं यच्चेदं यादृग् ज्ञेयं यतो यदा ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हर्ष की बात है कि आज चिरकाल में अखण्ड ज्ञातव्य पदार्थ जिस प्रकार जाना जाता है, जैसा उसका स्वरूप है, जिस तरह का वह है, जिन प्रमाणों से ज्ञेय होता है, जब जाना जाता है, यह सब मुझे ज्ञात हुआ