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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 60, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । अहो नु परमा दृष्टिर्दर्शिता भगवंस्त्वया । दावाग्निदग्धकक्षाणां दाहशान्तौ कलैन्दवी ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्‌, आपने मुझे, जैसे वनाग्नि से जले हुए तृणों की दाह की शान्ति होने पर, फिर पनपने के लिए चन्द्रमा की कला उगती है वैसे ही, संसारताप से सन्तप्त लोगों को शान्तिविवेक की प्राप्ति के लिए यह दृष्टि दर्शाई है