Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 60, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
सर्वं चैतद्यथादृष्टं स्थितमित्थमखण्डितम् ।
मायैवेयमनन्तेयं न च मायास्ति काचन ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सब यद्यपि मायादृष्टि से जैसा दिखाई देता है, वैसे ही ज्यों-का-त्यों
स्थित है, तथापि परमार्थदृष्टि से इसका संभव नहीं है, माया से उत्पन्न होने के कारण यह
सम्पूर्ण सृष्टि माया ही है और माया भी तो वास्तविक नहीं है