Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 60, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
परमार्थमहास्तम्भः सृष्टिं चेतति सादृशम् ।
यादृशो मे नरः पार्श्वे स्वप्ने क्षुब्धो महाभटैः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्न में मेरे समीप में महायोद्धाओं से छेडा गया पुरुष जागने पर भी सुषुप्त के सदश
अज्ञानमात्रस्वभाव ही है, वास्तविक नहीं है, वैसे ही ब्रह्मा की सृष्टि भी जाग्रत् होने पर भी
सुषुप्त के सदृश ही है