Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 62, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
कदाचिद्ब्रह्मसत्ताया व्यभिचारोऽनुमीयते ।
चित्रमाकाशकोशे च नान्यथा नियतेः स्थितिः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
परमार्थ दृष्टि से ब्रह्मसत्ता के समान व्यवहार में वह भी अव्यभिचरित है, ऐसा कहते है ।
यद्यपि ब्रह्मसत्ता का व्यभिचार ओर आकाश में चित्रलेखन अत्यन्त असंभावित है तथापि
उसका कभी (अज्ञानावस्था में) अनुमान हो सकता हे, परन्तु नियति की स्थिति विपरीत हो,
इसका तो अनुमान करना भी संभव नहीं हे