Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 62, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
विरिञ्चयाद्यात्मभिर्बुद्धैर्बोधायाविदितात्मनाम् ।
ब्रह्मात्मैव सा नियतिः सर्गोऽयमिति कथ्यते ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह बात व्यावहारिक दृष्टि से कही गई है, तात्तिक दृष्टि से तो ब्रह्म, नियति और सर्ग
शब्द के अर्थ में को भेद नहीं है, इस आशय से कहते है ।
तत्त्वज्ञानी विरचि आदि अज्ञानियों के बोध के लिए ब्रह्म ही वह नियति और यह सर्ग है,
ऐसा कहते हैं