Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 62, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
न स्याद्बुद्धिर्न कर्माणि न विकारादि नाकृतिः ।
केवलं त्वित्थमाकल्पं स्थित्या भाव्यमिति स्थिताः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि पहले भी कोई पुरुष निर्व्यापार
ही रहेगा, तो बुद्धि नहीं होगी, बुद्धि से होनेवाले कार्य भी नहीं होगे, कार्य से होनेवाले विकार
नहीं होगे ओर विकारों के गाय आदि से शरीरो के आकार नहीं होगे । इस विषय मेँ श्रुति भी
प्रमाण है- "यर््येतन्न कुर्यात् क्षीयेत ह” (यदि कर्म न करेगा तो क्षीण हो जायेगा) इस प्रकार
पुरुषकर्ममूलक ही कल्पपर्यन्त व्यवहारस्थिति होनी चाहिए, इस प्रकार नियति के कारण ही
सब पदार्थ स्थित हैं, यह अर्थ है