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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 62, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

पौरुषं न परित्याज्यमेतामाश्रित्य धीमता । पौरुषेणैव रूपेण नियतिर्हि नियामिका ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

बुद्धिमान्‌ पुरुष ऐसा निश्चय कर पौरूष का कभी त्याग न करे, क्योंकि नियति पौरुषरूप से ही नियामिका होती है, यानी पूर्वजन्मों मे किया गया पौरुष ही वर्तमान जन्म में नियतिरूप होकर “इसे ऐसा ही होना चाहिए" ऐसा नियम करता हे