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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 63, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 63, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

यत्र यदा यदेवासौ यथा भावयति तत्र तदा तदेवासौ प्रपश्यति ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

विभिन्न स्थानों में उसके विभिन्नरूपसे प्रकट होने में उसकी सत्यसंकल्पता ही कारण है, ऐसा कहते हैँ । जिस स्थान में, जिस काल में जिसकी जिस प्रकार से यह भावना करता है, वहाँ पर उस समय उसको वैसा ही देखता है