Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 64, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अन्ये स्व एव ये जीवा एवमेवाकृतिं गताः ।
पूर्वोत्पन्ने जगति ते यान्ति भूताश्रयां स्थितिम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो अन्य व्यष्टि-जीव हैं, वे भी इसी प्रकार अपने में वासनारूप से स्थित ही
आकृति को (देह आदि के आकार को) प्राप्त हुए है । उनमें अन्तर इतना ही है कि वे हिरण्यगर्भ
जीव के संकल्प के पहले उत्पन्न हुए ब्रह्माण्ड में देह को, जिसके माता-पितादिरूप भूत
आश्रय हैं, प्राप्त होते हैं