Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 66, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
यत्राभिलाषस्तन्नूनं संत्यज्य स्थीयते यदि ।
प्राप्त एवाङ्ग तन्मोक्षः किमेतावति दुष्करम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस वस्तु की अभिलाषा हो, उसका सर्वथा त्याग कर यदि पुरूष से रहा
जा सके, तो मोक्ष उसे प्राप्त ही है, केवल इतने में कौन-सी दुष्करता यानी कठिनाई हे