Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 66, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
जायते बालतामेति यौवनं वार्धकं ततः ।
मृतिं स्वर्गं च नरकं भ्रमाच्चेतो हि नृत्यति ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
पैदा होता है, बालक बनता है,
जवान होता है, फिर बुढ़ापे को प्राप्त होता है, मरण, स्वर्ग और नरक को प्राप्त होता है, यह
सब भ्रमवश चित्त का नाच है