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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 66, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

विचित्रबुद्बुदोल्लासे स्वात्मनो व्यतिरेकिणि । यथा सुरायाः सामर्थ्यं तथा चित्तस्य संसृतौ ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे आकाश में अनेक हजार बुद्बुदके आकार की भ्रान्ति उत्पन्न करने में शराबकी सामर्थ्य है, वैसे ही ब्रह्माण्डरूपी अनन्त बुद्बुद्रूप तथा आत्मा से अभिन्न संसार को उत्पन्न करने में चित्त की सामर्थ्य हे