Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
स्फुरणाज्जीवचक्रत्वमेति चित्तोर्मितां दधत् ।
चिद्वारिब्रह्मजलधौ कुरुते सर्गबुद्बुदान् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
चिति-रूपी जल ब्रह्मरूपी समुद्र में स्फुरण से (संचलन या स्पन्दन से) जीवरूपी
आवर्तता को धारण करता है तथा चित्तरूपी तरंगों को धारण करता हुआ बुद्बुद् रूपी सृष्टियों
की रचना करता है