Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
स्वस्थः सौम्य समस्यैतद्यत्सिंहस्य विजृम्भणम् ।
ब्रह्मणः संविदाभासस्तत्संचेत्यमिव स्वयम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे सौम्य श्रीरामचन्द्रजी, अपने बोधमात्र से मायाबन्धनका विनाश
करनेवाले या सिंह के सदृश अचिन्तनीय शक्तिवाले ब्रह्म का जो माया से देहधारण है, वही
आत्मस्थित संविदाभास जीव के सदुश स्थित है, वही स्वयं विषयरूप-सा होकर स्थित है,
उससे पृथक् नहीं है, यह भाव है