Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
अत्यन्तशुद्धे सन्मात्रे परिणामनिरामयम् ।
तुर्यातीतं पदं तत्स्यात्तत्स्थो भूयो न शोचति ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार शोधित प्रत्यगात्मा की अत्यन्त
शुद्ध सन्मात्र ब्रह्मात्मा में परिणति से निर्विकार जो स्थिति है, वही तुर्यातीत पद है, उस पद में
स्थित पुरुष फिर शोक नहीं करता हे