Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
स्वयं यां वेत्ति सर्वात्मा चिरं चेतनरूपिणीम् ।
सा प्रोक्ता जीवशब्देन सैव संकल्पकारिणी ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
सबका आत्मा ब्रह्म अनादिकाल से जिस चेतनरूपिणी को
यानी चित्त के संस्कार से उपहित (उपाधियुक्त) चैतन्य को (जीवशक्तिको) स्वयं जानता
है, वह इस समय “जीव” नाम से पुकारी जाती है और वही संकल्परूपिणी है