Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
तादृक्षवेदनात्सोऽथ रसशब्दार्थवेदनम् ।
भाविजिह्वार्थनाम्नैकदेशेऽनुभवति क्षणात् ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
जीव की क्रमश: इन्द्रियों की कल्पना को कहते हैं।
तदनन्तर शरीरपिण्ड में अस्फुट अहंभाव के ज्ञान से शरीर के मुखरूप एकदेश में भावी
रसनेन्द्रिय और उसके विषय रस के नाम से उपलक्षित रसनेन्द्रिय का क्षणभर में वह जीव
अनुभव करता है