Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 67
संस्कृत श्लोक
यथैव पद्मजादीनां जीवानां सदसन्मयी ।
सत्ता तथैव सर्वेषामासरीसृपमासुरम् ॥ ६७ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवत्व भी जगत्कोटि में ही है, ऐसा दशनि के लिए जगत् की सत्ता जीवसत्ता के तुल्य है,
ऐसा कहते हैं।
जैसे हिरण्यगर्भं आदि जीवों की सत्ता सदसन्मयी यानी यौक्तिक दृष्टि से विचारसहन
नहीं कर सकती, वैसे ही नीचे कीट, पतंग आदि तक और ऊपर देवयोनिपर्यन्त सबकी सत्ता
विचार सहन नहीं कर सकती ऐसी ही है यानी अनिवर्चनीय ही है