Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 68
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
संवित्संभ्रम एवायमेवमभ्युत्थितोऽप्यसन् ।
आब्रह्मकीटसंवित्तेः सम्यक्संवेदनात्क्षयः ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
परमार्थद्ष्टि से तो कहते हैं।
ब्रह्मा से लेकर कीट, पतंगपर्यन्त प्रसिद्ध संवित्ति (वृत्त्यात्मक ज्ञान) से अनुभवारूढ भी
यह संवत्संभ्रम असत् ही है, क्योंकि इसका सम्यक् ज्ञान से बाध हो जाता है