Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 74
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 74 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 74
संस्कृत श्लोक
मनसा ब्रह्मणा यद्यद्यथा दृष्टं विभावितम् ।
तत्तथा दृश्यते तज्ज्ञैः स्वभावस्यैव निश्चयः ॥ ७४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि बन्धन स्वकल्पित ही है, तो प्रत्येक पुरुष में उसकी अभिलाषा के अनुसार ही कल्पना
होगी, अनिष्टकल्पना नहीं होनी चाहिए, ऐसी आशंका पर कहते है ।
सब मनों के समष्टिरूप ब्रह्मा ने भोक्ता के कमनुसार जिस जिस वस्तु को जिस प्रकार
स्रष्टव्यरूप से देखा और जैसे कार्य के लिए उसकी कल्पना की, वह वस्तु अन्य जीवों द्वारा
वैसी ही देखी जाती है क्योकि नियति का ऐसा निश्चय हे