Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verses 81–82

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verses 81–82 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 81

संस्कृत श्लोक

ततो मनोहंकाराभ्यां स्मृतिरनुसंहिता तैस्त्रिभिस्तदनुभूततन्मात्राणि कल्पितानि तन्मात्रेषु जीवेन चित्तात्मना स्वयं काकतालीयवद्ब्रह्मोपादानादि यान्संनिवेशः कल्पितो दृश्यते ॥ ८१ ॥ एवं यदेव मनः कल्पयति तदेव पश्यति । सद्वा भवत्वसद्वा चित्तं यत्कल्पयत्यभिनेविष्टम् । तत्तत्पश्यति यास्यति सदिव प्रतिभासमुपगतं सद्यः ॥ ८२ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर मन और अहंकार से अनुभव के अनुसार स्मृति उत्पादित हुई, मन, अहंकार ओर स्मृति-इन तीनों ने स्मृति द्वारा अनुभूत यानी अनुभवानुसार स्मरण किये गये तन्मात्राओं की कल्पना की (सृष्टि की), तन्मात्राओं में चित्तरूप जीवने ब्रह्मरूप उपादानकारण से अनन्तब्रह्माण्डों से विस्तृत संसारसागर की काकतालीयन्याय से कल्पना की