Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 69, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 69, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
आतुरं चिन्तयेच्चन्द्रे रसायनहृदि स्थितम् ।
अजरामरणं युक्तं मुक्तं सर्वाधिविभ्रमैः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसके हृदय में रसायन है ऐसे चन्द्रमा मेँ रोगी पुरुष की स्थिति की भावना
करे ओर यह भावना करे कि रोगी जरा ओर मरण से रहित हो गया, सम्पूर्ण मानरी व्यथाओं
से मुक्त हो गया ओर समाहित हो गया