Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 69, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 69, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
साधको हि शुचिर्भूत्वा स्वाचान्तः सुसमाहितः ।
क्रमेणानेन सकलां प्रोच्छिनत्ति विषूचिकाम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
साधु पुरूष पवित्र होकर आचमन करके एकाग्र
चित्त हो क्रमशः इस उपाय से सम्पूर्ण विसूचिका का विनाश करता है