Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 7, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
य एष देवः कथितो यस्मिञ्ज्ञाते विमुच्यते ।
वद क्वासौ स्थितो ब्रह्मन्कथमेनमहं लभे ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रस्ताव द्वारा जिज्ञासित साधन के ज्ञात होने पर प्रस्तुत जगत्कारण के वास्तविक स्वरूप
को जानने की इच्छा से श्रीरामचन्द्रजी बोले :
ब्रह्मन्, हिरण्यगर्भ आदि के कारणभूत जिस प्रत्यगात्मरूप देव का आपने पहले वर्णन किया
है, जिसका ज्ञान होने पर पुरुष विमुक्त हो जाता है, वह देवाधिदेव कहाँ स्थित है तथा उसे मैं
कैसे प्राप्त कर सकता हू, यह आप मुझे बतलाने की कृपा कीजिए
सर्ग सन्दर्भ
छठा सर्ग समाप्त सातवाँ सर्ग हिरण्यगर्भ आदि जगत्का मूल कारणभूत जिस देवाधिदेव का पहले वर्णन हो चुका है, सम्पूर्ण उपाधियों से शून्य उसके तत्त्व का वर्णन ।